विकास के प्रारूप | Development Patterns in Hindi
विकास के प्रारूप (Development Patterns in Hindi)
विकास के प्रारूप (Development Patterns in Hindi)
1. पूंजीवादी विकास के प्रारूप:
आर०एफ० हेराड, ई डोमर, जे०आर हिक्स, आर सोलो आदि के विचार केनेसियन माडल पर आधारित हैं अतः केनेसियन माडल का विश्लेषण आवश्यक हो जाता है।
(i) जोन मेयनार्ड कीन्स माडेल-
ए सिसिल पिगू के सामान्य एकरूपता के सिद्धान्त पर आधारित जे०एम० कीन्स के माडेल की प्रमुख विशेषताए है-
1. धन ऐसे पर्यावरण में भ्रमण करता है जिसमें उसके प्रभाव का त्वरित विस्तार होता है।
2 ब्याज की दर से बढ़ने और घटने पर विकसित पूंजी वाली आर्थिक व्यवस्था अनुपयुक्त पूंजी का उपयोग बढता है।
3 अनुपयुक्त संसधानो का भी उपयोग होने लगता है जैसे प्रशिक्षित श्रमिकों उत्पादन के मशीनों आदि का उपयोग होने लगता है।?
4. ऋण का भुगतान, खर्च से बचत, आयात में वृद्धि होती है।
5 अधिक धन राशि का आगमन होता है।
6 अनिक्षित बेरोजगारी विकास में बांधा नहीं बनती .
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कीन्स के माडल विकसित देशों के लिए तो है परन्तु विकाशसील देशों के सन्दर्भ में उतना प्रभावी इसलिए नही माना जा सकता क्योकि विकसित देशों में विकास हेतु ही उनका माडल अधिक महत्वपूर्ण है।
(ii) टालकाट पारसन्स एक्शन माडल :
पारसन्स का मानना है कि परिवर्तन दो प्रमुख आधारभूत प्रक्रियाओं के माध्यम से होता है।
1. कार्य करने की प्रकिया जिनसे बाधाए दूर की जाती है और एकीकरण वाली संरचनात्मक व्यवस्था को जैसे का तैसा बने रहने दिया जाता है तथा अनुकूलन की प्रक्रिया में तेजी लायी जाती है।
2. सीख की प्रक्रिया से व्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन लाया जाता है। वेबर का माडेल वेबर का मानना है कि प्रत्येक संस्कृति के लोग मशीन के युग की आवाश्यकतानुसार अपने प्रकार से सक्रिय रूप से तादाम्य स्थापित कर कार्य करेंगे । विवेकीकरण में उनका अटूट विश्वास था जिन पर आधुनिक व संस्थागत कार्य होंगे और देश विकास के पथ पर अग्रसर होगा.
2. सामाजवादी विकास के प्रारूप:
- सामाजवादी विकास के प्रारूप के सम्बन्ध में कहा जाता है कि इसका आधार नये प्रकार के विकास की मॉग से सहसम्बन्धित है जिसके उददेश्य और तरीके अथवा ढंग बहुआयामी है। इसका पूरा जोर विकासशील और ओद्योगिक देशों के सम्पूर्ण सामाजिक, राजनैतिक आर्थिक संरचनात्मक ढांचे को पूरी तरह से पुनः संरचित करने पर रहा है।
3. आचार्य नरेन्द्र जय प्रकाश नारायण, विनोबा भावे, महात्मा गाँधी के वैकल्पिक माडल
- आचार्य नरेन्द्र जय प्रकाश नारायण का समाजवाद सबको (समानता) बिना किसी भेदभाव के बिना किसी जाति पाति धर्म के बन्धन को प्रदान करता है सभी को अपने अधिकार और कर्तव्यों का निर्वाह करना समाज द्वारा अपेक्षित आर्थिक समाजिक न्याय का अधिकार सभी को है। क्षेत्र भाषा, प्रजाति,रंग, लिंग आदि अनेक आधारो पर कोई किसी से अलग नही समझा जाना चाहिए। अपने व्यक्तिगत समाजिक - राजनितिक जीवन में सभी को अपना विकास करने का अवसर मिलना चाहिए । आजिविका शिक्षा, रोजगार, कर्मकाण्ड जाति धर्म का भेद न करते हुए प्रत्येक क्षेत्र के लोगो को समानता के आधार पर अधिकार प्रदान करना सरकार का कर्तव्य एवं कल्याणकारी राज्य का दायित्व भी है।
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