डी. एन. ए. फिंगर प्रिन्टिंग DNA प्रोफाइलिंग क्या होती है ? What is DNA Finger-printing?
डी. एन. ए. फिंगर प्रिन्टिंग क्या होती है ? What is DNA Finger-printing?
डी. एन. ए. फिंगर प्रिन्टिंग क्या होती है ?
- डी.एन.ए. फिंगर प्रिटिंग एक अत्याधुनिक जैविक तकनीक है। इसका मुख्य आधार है- प्रत्येक व्यक्ति में पाया जाने वाला DNA पुनरावृत्ति (DNA replication) का असमान होना अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति का DNA पैटर्न एकमात्र और अनोखा होता है। यहाँ तक की क्लोनिंग से प्राप्त समरूप बच्चों का डी.एन.ए. पैटर्न भी अलग होगा। अतः इसका प्रयोग मनुष्य की पहचान करने के लिए किया जा सकता है। जिसके कारण इस तकनीकी को DNA फिंगर प्रिंटिंग कहा जाता है। यह साधारण प्रिंटिंग से बेहतर होता है क्योंकि इसमें किसी प्रकार के परिवर्तन की संभावना नहीं है।
डी.एन.ए. फिंगर प्रिंटिंग के लाभ
(1) जैविक सबूतों के आधार पर अपराध जैसे खून, बलात्कार अनुसंधान क्रम में वास्तविक अपराधी को पकड़ने के लिए।
(2) वंशानुगत बीमारियों की पहचान करने और उनके लिए चिकित्सा पद्धति का विकास करने के लिए।
(3) बच्चे के वास्तविक माता-पिता के निर्धारण के लिए।
(4) पैतृक संपत्ति संबंधी दावों को निपटाने के लिए।
(5) यह युद्ध
पीड़ितों, सैनिकों के लाशों
को पहचानने में मदद करेगा,
विशेषतः तब जब
उनके लाश म्यूटेट (परिवर्तित) हो गए हों।
DNA क्या होता है ?
- पतले धागे तथा घुमावदार सीढ़ी जैसी संरचना वाला DNA (De-oxy-ribo-nucleic Acid- डी-ऑक्सी- राइबो-न्यूक्लिक एसिड) वह अणु है जो शरीर की क्रियाओं और आनुवंशिकी का नियंत्रण करता है। इस अणु में चार क्षार—अडेनिन (A=Adenine), थाएमिन (T=Thymine) साइटोसिन (C=Cytosine) और ग्वानिन (G= Guanine) विशिष्ट क्रम में जमे होते हैं। इन चार क्षारों A, T, C और G के क्रम से ही तय होता है कि DNA का कौन-सा खंड कौन-से प्रोटीन का निर्माण करेगा। प्रत्येक जीव में यह क्रम विशिष्ट अर्थात् अलग होता है।
- प्रायः गुणसूत्रों में होता है DNA
- DNA प्रत्येक जीवित कोशिका के लिये अनिवार्य है, जो इन कोशिकाओं के गुणसूत्रों में पाया जाता है।
- एक कोशिका में गुणसूत्रों के सेट अपने जीनोम (DNA में मौजूद जीन का अनुक्रम) का निर्माण करता है।
- मानव जीनोम 46 गुणसूत्रों की व्यवस्था में DNA के लगभग 3 अरब आधार जोड़े ( Base Pairs) हैं।
- उल्लेखनीय है कि जीन आनुवंशिकता की मूलभूत शारीरिक इकाई है, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होती रहती है।
- इसी में हमारी आनुवंशिक विशेषताओं की जानकारी होती है, जैसे-हमारे बालों का रंग कैसा होगा... आंखों का रंग क्या होगा...या हमें कौन सी बीमारियाँ हो सकती हैं...आदि-इत्यादि।
- यह सबकुछ माता-पिता से उनके बच्चों में DNA के माध्यम से स्थानांतरित होता है।
DNA प्रोफाइलिंग क्या है?
- सरलतम शब्दों में कहा जाए तो किसी व्यक्ति की फॉरेंसिक पहचान करने के काम को DNA प्रोफाइलिंग कहा जाता है।
- इसके लिये किसी व्यक्ति के त्वचा, लार, रक्त या बाल जैसे जैविक नमूने लेकर DNA प्रोफाइलिंग का काम किया जाता है।
- यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक व्यक्ति अथवा उसके ऊतक (Tissue) के नमूने से एक विशेष DNA पैटर्न (जिसे प्रोफाइल कहा जाता है) लिया जाता है।
- लगभग शत-प्रतिशत (99.9%) DNA अनुक्रम सभी व्यक्तियों में एक जैसा होता है।
- केवल 0.1% अंतर की वज़ह से प्रत्येक मनुष्य का DNA एक-दूसरे से अलग होता है और इसी आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान की जा सकती है।
DNA प्रोफाइलिंग का उपयोग
- किसी व्यक्ति की वास्तविक जैविक पहचान प्राप्त करने के लिये DNA विश्लेषण एक अत्यंत उपयोगी एवं सटीक तकनीक है।
- इसके अंतर्गत अपराध के स्थान से प्राप्त बाल के नमूने, खून के धब्बे की सहायता से उस अपराध से संबंधित व्यक्ति की पहचान की जा सकती है।
- DNA परीक्षण के माध्यम से किसी व्यक्ति की शारीरिक बनावट, उसकी आँखों के साथ-साथ त्वचा के रंग का भी पता लगाया जा सकता है।
- निकटतम पारिवारिक संबंधों (जैसे-माता-पिता अथवा संतान) की पहचान करना।
- आपदा पीड़ितों की पहचान करना।
- किसी व्यक्ति की बीमारी आदि के संबंध में भी जानकारी पता की जा सकती है।
DNA की रासायनिक प्रकृति
- जैसा हमने ऊपर बताया है कि DNA का एक अणु चार अलग-अलग रासायनिक घटकों से मिलकर बना होता है, जिन्हें न्यूक्लियोटाइड कहते hain। नाइट्रोजन युक्त इन न्यूक्लियोटाइड्स में डिऑक्सीराइबोस नाम का एक शर्करा पाई जाती है। इन न्यूक्लियोटाइड्स को फॉस्फेट का एक अणु जोड़ता है। न्यूक्लियोटाइड्स के संबंध के अनुसार किसी कोशिका के लिये आवश्यक प्रोटीनों का निर्माण होता है। अतः प्रत्येक जीवित कोशिका के लिये DNA का होना अनिवार्य है।
DNA प्रोफाइलिंग की नई तकनीक
- अमेरिका की IntegenX Inc. ने DNA प्रोफाइलिंग की नई तकनीक का विकास किया है, जिसे Rapid HIT DNA प्रणाली कहा जाता है।
- इस प्रणाली में खून के धब्बे या लार के नमूने के माध्यम से DNA प्रोफाइलिंग की जाती है।
- इस प्रणाली के उपयोग से केवल दो घंटे के भीतर किसी भी व्यक्ति का DNA प्रोफाइल तैयार किया जा सकता है।
- सीरिया में मारे गए 39 भारतीयों की पहचान DNA प्रोफाइलिंग से हुई थी
- इराक के मोसुल से करीब चार साल पहले अगवा हुए 39 भारतीय मारे गए हैं, इसकी पुष्टि हाल ही में सरकार ने तब की जब उनके DNA नमूनों का मिलान उनके निकट परिवारीजनों के DNA से होने की पुष्टि हो गई। इसके लिये मोसुल के उत्तर-पश्चिम में बादोश गाँव के नज़दीक चार साल से सामूहिक कब्र में दफन भारतीयों के DNA नमूने रेतीली मिट्टी से लेकर परिवार वालों से उसका मिलान किया तो पता लगा कि IS के आतंकियों ने उनकी हत्या की है।
DNA प्रोफाइलिंग बोर्ड?
- DNA प्रयोगशालाओं को स्थापित करने की प्रक्रिया का निर्धारण करना और उनके लिये मानक तय करना तथा ऐसी प्रयोगशालाओं को मान्यता प्रदान करना।
- DNA प्रयोगशालाओं से संबंधित मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्रालयों और विभागों को सलाह देना।
- प्रयोगशालाओं के पर्यवेक्षण, निगरानी, निरीक्षण की ज़िम्मेदारी भी इसी बोर्ड की होगी।
- यह बोर्ड DNA संबंधी मामलों का समाधान करने के लिये पुलिस और अन्य जाँच एजेंसियों को प्रशिक्षण देने हेतु दिशा-निर्देश भी जारी करेगा।
- अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप DNA परीक्षण से संबंधित मुद्दों पर नैतिक और मानवीय अधिकारों के संबंध में सलाह देना।
- यह बोर्ड DNA परीक्षण और संबंधित मुद्दों पर अनुसंधान और विकासात्मक गतिविधियों की भी सिफारिश करेगा।
- इस विधेयक में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तरों पर DNA डेटा बैंकों के निर्माण की बात की गई है, जो मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से प्राप्त DNA प्रोफाइल को संग्रहीत करने के लिये ज़िम्मेदार होंगे।
DNA डेटा बैंक
- यह मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं द्वारा भेजे गए DNA प्रोफाइल्स का संग्रहण करेगा और डाटा की विभिन्न श्रेणियों के लिये कुछ सूचकांकों, जैसे-अपराध स्थल सूचकांक, संदिग्ध सूचकांक, आपराधिक सूचकांक, गायब व्यक्ति सूचकांक और अज्ञात मृत व्यक्ति सूचकांक का प्रबंधन करेगा।
- इस प्रकार लापता व्यक्तियों के परिवारों को उनके शारीरिक नमूनों के आधार पर उनकी सूचना दी जा सकेगी ।
- DNA प्रोफाइल और उनके उपयोग के रिकॉर्ड के संबंध में विश्वनीयता बनाए रखना।
- DNA प्रोफाइल को विदेशी सरकारों अथवा सरकारी संगठनों अथवा एजेंसियों के साथ केवल अधिनियम में उल्लिखित उद्देश्यों के लिये ही साझा किया जाएगा।
- इन प्रावधानों के उल्लंघनकर्त्ताओं को 3 वर्ष तक की सज़ा तथा 2 लाख तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
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